तुम्हारी नजरो का इशारा कई बार हुआ

 तुम्हारी नजरो का इशारा कई बार हुआ
 तुम्हारी इस अदा से हमको कितना प्यार हुआ
 ऐसा पहले ना कभी अपना हाल देखा
 तुम्हारी एक मुस्कान से मौसम भी शराबी हुआ



 ना जाने किस को नजर ढूंढती है
 इन्हें शायद तुम्हारी जुस्तजू है
 उसे दुनिया से क्या लेना है
 जिस दिल को तुम्हारी आरज़ू है

 वो नजर कितनी हंसी है,जिस पर लूटी हर खुशी है
 मेरी ये पहली मोहब्बत आज कली बन कर खिली है
  जिसको मैं  सुना  ना पाया ,होठो पर कभी ना ला पाया
 मेरी इन प्यासी नजरों की तू  वो   नदी है
  तुम्हारी हर अदा  मेरे  दिल की  धड़कन बनी है



 नजरों से टकराकर आईना  भी  टूट  जाता   है

 ऐसे ही नहीं किसी से दिल लगा लिया जाता है

 जाने क्यों तुमको देख कर कहीं खो गया यह दिल

 आंखों में तुम्हारी हमको   प्यार  नजर आता है

 मेरा यह दिल तुमको देख  कर धड़क   जाता है

तुम्हारी यादों का सपना रोज हमको सत्ता जाताहै

j tras

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