बहुत खूबसूरत ग़ज़ल होठों पर आई है
कितनी खूबसूरत इस चमन में एक
कली मुस्कुराई है
जगी थी जो मुद्दत से दिल में
तुमने आज वो प्यास बुझाई है
रुठ जाए ना कभी हमसे हमारी मोहब्बत
खुदा से हर रोज दुआ करते हैं
सजा रहे फूलों से सदा यह बाघ हमारी मोहब्बत का
इसलिए इसको पतझड़ के मौसम से बचाया करते हैं
दुश्मन प्यार के बहुत होते हैं जमाने में
इसलिए अपने प्यार को जमाने की नजरों से छुपाया करते
कितनी खूबसूरत इस चमन में एक
कली मुस्कुराई है
जगी थी जो मुद्दत से दिल में
तुमने आज वो प्यास बुझाई है
रुठ जाए ना कभी हमसे हमारी मोहब्बत
खुदा से हर रोज दुआ करते हैं
सजा रहे फूलों से सदा यह बाघ हमारी मोहब्बत का
इसलिए इसको पतझड़ के मौसम से बचाया करते हैं
दुश्मन प्यार के बहुत होते हैं जमाने में
इसलिए अपने प्यार को जमाने की नजरों से छुपाया करते