सुबह के जागे हुए फूलों की खुशबू अब जाने लगी है
आपके इंतजार में रोशनी भी हमसे रूठने जाने लगी है
रात अकेली आई अंधेरे की चादर ओढ़ के. आपके आने
की फिक्र में आंखों से रूठ कर नींद अब जाने लगी है ये पैगाम जमाने में सब ने सुना होता है
अंजाम प्यार का जमाने में जुदा होता है
रुठा कभी दीवानों से खुदा होता है
रस्में मोहब्बत को क्यों निभाई जाती है
हाथों से अपने खुद जिंदगी मिटाई जाती है
दिन ऐसा भी आएगा हमको तुम याद करोगे
मेरी मोहब्बत पर तुम एतबार करोगे
अब तो दिल मेरा तुमने तोड़ दिया
एक दिन मेरे पास आकर तुम फरियाद करोगे