मेरी इन खामोश नजरो की तन्हाई है
तुम्हारे यहां खुशियों की शहनाई है
यहां उदास रातों के अंधेरे हैं
तुम्हारे पास खुशियों के सवेरे हैं
खामोश निगाहों में उदासी की बदली है
भटके हुए मुसाफिर की अनजान सी मंजिल है
हम तुमको अपना बना ना पाए
शायद खुदा की यही मर्जी है
अधूरी मोहब्बत का यह Veerana है
छोटा हाथ से तुम्हारा भी सहारा
तन्हा दिल की लंबी हो जाती है रातें
इस लंबे सफर का हम ढूंढे कहां किनारा
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