कब सोचा था बदला प्यार का बेवफाई होगा

कब सोचा था बदला प्यार का बेवफाई होगा
तुमने जो सुनाया पैगाम वह दर्दे जुदाई होगा
हमने जो ख्वाब देखा था मोहब्बत का
हमें क्या मालूम था मुकद्दर गम-ए-तन्हाई होगायू तो आपकी याद के सहारे जिंदगी कट ही जाएगी
मगर फिर कोई बाहर इधर लौट के ना आएगी
मैं मर जाऊंगा उसी दिन आपके कसम सनम
जिस दिन आपके हाथों में किसी और के नाम
की मेहंदी रच जाएगी

 तेरी याद को भी इस दिल से निकाल देंगे
 भेजे हैं जो खत तुमने उनको भी हम फाड़ देंगे
 कब तक रहेंगे हम पर ये  गम के साए
 हम अपने आप को इनसे निकाल लेंगे

j tras

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