एक पल की दूरी सदियों का सफर बन गई

  एक पल की दूरी सदियों का सफर बन गई
  फूलों के मौसम में ये आंधी जाने कहां से चल गई
  सोचा बहुत और  रोका इसे बहुत हमने
  फिर भी हमारी जिंदगी दर्द की निशानी बन गई



  मेरी बेचैनी को कोई जाने या ना जाने
  हमको पता है तुम इसको पहचानोगे
  लुटा आया हूं सब कुछ मैं तेरी मोहब्बत में
  ये  बात तो तुम मानोगे
  मोहब्बते ठंडी आओ की मीठी निशानी है  
  हाथ खाली है आज मेरे तुमको पता है
  फिर भी आज तुम हमसे और क्या मांगोगे   

  
याद   तुम्हारी   आ    रही    है
ये जिंदगी हमसे रूठ कर जा रही है
खुशी  दो  पल   की   मिली थी मगर     
उसकी यादों में ये नजरें आंसू बहा रही है  

    

j tras

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